७. शांडिल्य (उपाध्याय )
महऋषि कश्यप के पुत्र ाषित हुए | ाषित के पुत्र वशिष्ठ हुए शांडिल्य गौत्र में प्रधान हुए | इस वंश में उत्पन्न गौत्र इस प्रकार है |
६. जातुकर्ण (दुबे)
ब्रह्मा के पुत्र अत्रि | अत्रि के पुत्र भगवान कृष्णत्रय पुनर्वसु महऋषि हुए | उनके शिष्य जातुकर्ण हुए | उनके वंश में उत्पन्न गौत्र इस प्रकार है |
१. आस्टेव
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२. आसतवाल
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३. आसवाल
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४. आसपालया
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५. आसीवाल आसईवाल
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६. औडेण ओढेण
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७. कडवाल करवाल
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८. वरवनिया
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९. काकटेव
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१०. काकटाइन
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११. करहोतिया
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१२. कसारिया
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१३. कैलडिया
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१४. कोलिया
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१५. कोणदिया
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१६.घनोरिहा
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१७. नारनौलिया
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१८. बन्दइया
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१९. वविहावरवे वरेवा
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२०. विसानीवाल विसापलवाल
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२१. बंधोलिहा
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२२. भिंडवाल
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२३. भीषणा
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२४. मिथिला
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२५. मीशन
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२६. मुर- रिहा
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२७. मुसनानियाँ
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२८. मैथिल
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२९. मंडोरिया
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३०. मुरोठिया
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३१. सहरनपुरिया
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३२. शकडीवी
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३३. सोरुढा
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३४. सुबाल
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३५. सुबेड़ी
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३६. सोमपुरिया
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८. कोंडिय उपाध्याय (ओझा )
ब्रह्मा के पुत्र मरीचि | मारीच के पुत्र कश्यप | कश्यप के मित्र वरुण तथा उनके वशिष्ठ हुए | वशिष्ठ के कौडिन्य | कौडिन्य के वंश में निम्न गौत्र पाए गए |
१. अकोनही
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२. अखोया अखोरी
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३. अचारिया
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४. उज्जैनवाल उज्जैनियाँ
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५. ककराड़ियाँ
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६.
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