कुँअर बाबा के मंदिर पर कैसे होता है सर्प दंश का इलाज : 

मध्य प्रदेश के दतिया जिले से 55 दूर रतन गगढ़ के सघन वन में स्थित है माता रतनगढ़ का मंदिर जो वर्षों से लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है | 
ऐसा माना जाता है की इस मंदिर में आकर कोई भी सर्प दंश से मुक्ति पा लेता है तभी यहाँ लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते है हर वर्ष | चमत्कारिक होने के साथ साथ यह एक सिद्ध स्थान भी है जहाँ बाबा कुँअर महाराज व मदुला देवी की कृपा भी है | 

कौन थे कुंअर बाबा :

इस कहानी को हम विस्तार से अपनी दूसरी पोस्ट में लिख चुके है अगर आप पढ़ना चाहते है तो नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें | 

https://neelamtrip.blogspot.com/2019/12/blog-post_81.html
ऐसे होता है सर्पदंश का इलाज : 

ऐसा मन जाता है की अगर आपको कभी भी सर्प काट ले तो आपको उस जगह पर जिस जगह पर सर्प ने कटा है एक बंध लगा देना है 
बंध का मतलब है की हाथ में सुद्ध मिटटी लेकर, कुँअर बाबा का नाम लेकर उस स्थान पर लगा देना जिस स्थान पर सर्प ने कटा है |

इनके नाम की इनकी शक्ति होती है की फिर जहर आपके शरीर पर असर नहीं करता है | 

हर वर्ष यहाँ दिवाली की दौज पर एक विशाल मेले का आयोजन होता है और उसी दिन ये बंध कटे जाते है | और रोगी को सर्प दंश से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाती है 

क्या होता है रोगी के साथ :

जब रोगी बंध कटवाने के लिए मंदिर की और जाता है तो बीच रस्ते में, मंदिर से 5 किलोमीटर पहले एक नदी पड़ती है जिसका नाम है सिंध नदी | जब रोगी इस नदी से गुजरता है तो वह अपने आप ही बेहोश हो जाता है 
उसके साथ गए लोग उसको उठाकर मंदिर तक ले जाते है और कुँअर बाबा के चबूतरे पर रख देते है पुजारी अब पूजा करके उसके माथे पर नीम का एक झौंका मरता है जिससे वह अचेतन अवस्था से चेतन हो उठता है 
इसके बाद वह मंदिर की परिक्रमा कर प्रसाद लगता है और इस तरह उसका बंध काट जाता है

अब आपके मन में यह प्रश्न हो सकता है अगर किसी जानवर को सर्प ने कटा हो तो क्या करेंगे | इस अवस्था में आप उसके काटे हुए स्थान पर बंध लगा दे और दिवाली की दौज पर उसके गले की रस्सी को ही लाना होता है अब जैसे ही आप नदी से गुजरेंगे रस्सी सर्प की तरह मुड़ने लगेगी इसे सम्हाल तक कुँअर बाबा के मंदिर तक ले जाना होता है इसके बाद पुजारी बंध काट देता है | 
खास बात यह है की दिवाली की दौज पर लाखों श्रद्धालु यहाँ आते है फिर भी बंध वाले को पहले मंदिर तक भेजा जाता है | 
यहाँ प्रशासन की व्यवस्था 1 महीने पहले से ही चुस्त दुरुस्त हो जाती है वर्ष 2006 में यहाँ एक भीषण हादसा हो गया था जिसमे 250 श्रद्धालु मर गए थे |

इसका मेरे पास कोई वैज्ञानिक प्रमाण तो नहीं है पर ये लोगों की आस्था ही है जो सैकड़ों लोग यहाँ से ठीक होकर जाते है जिसको कभी न कभी सर्प ने काटा है | 

कैसे पहुंचे मंदिर : 

कैसे पहुचें :
-----------------------------
दतिया से दूरी = 55 किलोमीटर
ग्वालियर से दूरी = 80 किलोमीटर
सेवढ़ा से दूरी = 35 किलोमीटर
झाँसी से दूरी = 85 किलोमीटर

यहाँ आप टैक्सी /स्वयं की गाडी या बाइक से जा सकते है | यहाँ पर रेल की या बस  सुविधा नहीं है |
आप यहाँ खुद की गाडी या बाइक से जाना आपके लिए बेहतर है |


अगर आपको ये पोस्ट अच्छी लगी हो तो हमें कमेंट करें | तब तक के लिए जय माँ रतनगढ़ वाली 

धन्यवाद 
नीलम झा