भारत की आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति 5000 वर्ष पुरानी चिकित्सा पद्धति है आयुर्वेद को जीवन का विज्ञान भी कहा जाता है इसमें प्राकृतिक तरीके से रोगी का उपचार किया जाता है भारत में आयुर्वेदिक का इतिहास बरसों पुराना रहा है
जानिए आप आयुर्वेदिक में कैरियर कैसे बना सकते हैं
कोविड-19 में आयुर्वेदिक दवाओं व चिकित्सा को नई अहमियत मिली है सरकार ने कोरोनावायरस के विरुद्ध लोगों में यूनिटी बढ़ाने के लिए आयुर्वेदिक संगठनों के उपयोग की सफल रणनीति लागू की है पिछले वर्ष 2020 में सरकार की ओर से दुनिया के कई देशों को आयुर्वेदिक दवाइयों का बड़े पैमाने पर निर्यात किया गया है और वर्ष 2021 में इनके निवासी कई संभावनाएं निर्मित हुई है 2021-22 के बजट में आयुर्वेदिक सेक्टर के लिए अच्छा आवंटन हुआ स्वस्थ भारत योजना आम जन स्वास्थ्य योजनाओं में आयुर्वेदिक सेक्टर को प्राथमिकता दी गई है इन विभिन्न प्रमुख कारणों से आयुर्वेदिक चिकित्सा और आयुर्वेदिक में कैरियर की नई संभावनाएं आगे बढ़ी हैं
डब्ल्यूएचओ की घोषणा
पिछले वर्ष मार्च में आयुर्वेदिक दिवस के मौके पर डब्ल्यूएचओ ने घोषणा की कि वह भारत के में पारंपरिक दवाओं के लिए एक वैश्विक केंद्र की स्थापना करेगा और इससे आयुर्वेदिक दवाओं के अनुसंधान प्रशिक्षण बाजार गुप्ता के नए अध्याय लिखे जा सकेंगे
21-22 बजट में अखिल भारतीय आयुर्वेदिक संस्थान का बजट 76.50 करोड़ रुपए से बढ़कर 358 करोड हुआ
58 तरह की विभिन्न सर्जरी कर सकेंगे आयुर्वेदिक चिकित्सा की डिग्री हासिल करने वाले डॉक्टर |
--> स्किल्स के आधार पर बढ़ते कैरियर के मौके आयुर्वेदिक कोर्स हिंदी व अंग्रेजी में होता है लेकिन आयुर्वेद से संबंधित शब्दावली व किताबें संस्कृत में उपलब्ध हैं इसलिए इस क्षेत्र में संस्कृत का ज्ञान होना आवश्यक है
--> आयुर्वेदिक में कैरियर बनाने के लिए चिकित्सा कार्य में संतुष्टि और मानव सेवा में गहरी रूचि होना जरूरी है विपरीत परिस्थितियों में भी संयम से काम लेने की क्षमता हर पल कुछ नया जानने तथा रिसर्च करने की क्षमता हो कोविड-19 के बीच अब आयुर्वेदिक दवाइयों पर डॉक्टरों की अहमियत और बढ़ गई है
--> इस समय देश के कोने कोने में आयुर्वेदिक शिक्षा के विभिन्न शासकीय और निजी क्षेत्रों के कॉलेजों में से अपनी उपयोगिता के अनुरूप किसी गुणवत्तापूर्ण कॉलेज से डिग्री लेकर आयुर्वेदिक के क्षेत्र में अवसर मौजूद हैं
--> पिछले वर्ष 23 नवंबर 2020 को केंद्र सरकार ने सुनिश्चित किया था कि आयुर्वेदिक डिग्री धारक डॉक्टर 58 तरह की सर्जरी कर सकेंगे | डॉक्टरों को इन सेवाओं का प्रशिक्षण लेने की मंजूरी दे दी है ट्रेनिंग मॉड्यूल भी उसका हिस्सा बनेगा आयुर्वेद के पी जी छात्रों को सर्जरी सम्बन्धी जानकारी मिलेगी |
रोजगार के मौके
आयुर्वेदिक चिकित्सा की डिग्री लेने के बाद कई तरह के रोजगार व स्वरोजगार के मौके हैं|
किसी अस्पताल से जुड़कर कार्य कर सकते हैं या फिर खुद का क्लीनिक खोल कर लोगों को चिकित्सा सेवा दे सकते हैं
आयुर्वेदिक दवा निर्माता कंपनियों की संख्या में इजाफा और विदेश में भी इस क्षेत्र में रोजगार के नए आयाम खुल रहे हैं
विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए अधिक से अधिक पंचकर्म केंद्र बनाए जा रहे हैं
देश में सरकारी अस्पतालों में भी आयुर्वेदिक चिकित्सकों की नियुक्तियों को अहमियत मिलेगी
इसके अलावा आयुर्वेदिक दवा निर्माण आहार विशेषज्ञ और आयुर्वेदिक कॉलेजों में अध्यापन जैसे कई अच्छे कैरियर के मौके आसानी से पाए जा सकते हैं
ऐसे पाएं बीएएमएस की डिग्री
बीएएमएस का मतलब है आयुर्वेद इन मेडिसिन एंड सर्जरी स्कूल में नामांकन के लिए किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड फिजिक्स केमिस्ट्री और बायो में पांच राज्यों में साढे 5 वर्ष की अवधि वाले बीएएमएस कोर्स के लिए परीक्षाएं होती हैं आयुर्वेद में एमडी एमएस में पीजी डिग्री ले सकते हैं






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