धरोहरों का शहर : हमारा ग्वालियर 

ग्वालियर की धरोहरें विश्व में एकलौती  है जिसे देखने देश- विदेश से पर्यटक आते है | 

 

ग्वालियर का 9 वीं शताब्दी में बना चतुर्भुज मंदिर





शून्य का सबसे पहला प्रमाण : 

ग्वालियर के किले में स्थित चतुर्भुज मंदिर से मिला 


स्मार्ट ट्रिप विथ नीलम (ग्वालियर)    ग्वालियर में कई धरोहरें ऐसी है जो विश्व में एकलौती है कई ऐसे अजूबे है जो और पूरी दुनिया में जाहि नहीं है इन्हे देखने के हर साल लाखों देशी- विदेशी पर्यटक यहाँ आते है इन्ही में से एक है ग्वालियर के किले में स्थित भगवन चतुर्भुज का मंदिर, जो की भगवान विष्णु को समर्पित है यहाँ स्थित एक शिलालेख में शुन्य  नजर आता है इस शिलालेख को देखने के लिए पर्यटक अपने दोस्तों हुए रिश्तेदारों के साथ आते है  और फोटो सेशन कराकर जाते है | 

 

नागर व द्रविड़ मिश्रित शैली दिखती है चतुर्भुज मंदिर में 



अब पूरी दुनिया मान चुकी हैकि शुन्य का अविष्कार भारत में ही हुआ था ग्वालियर के चतुर्भुज मंदिर में इसका प्रमाण भी मौजूद है ग्वालियर किले पर नौवीं शाब्दि के चतुर्भुज मंदिर में लगे एक शिल्लेख से इसका प्रमाण  मिलता है इसी शिलालेख में लिखा है की पूजा के लिए फूलों की 50 मालाएं प्रतिदिन यहाँ चढ़ाये जाने के लिए मंदिर के पुजारी को 270 गुणा 187 हाथ जमीन दी जाती थी इस शिलालेख में दो जगह शून्य का प्रयोग किया गया है पुरातत्व वैज्ञानिक और गणितज्ञ मानते है की अविष्कार के बाद यह शून्य का सबसे पुराण लिखित प्रयोग है चतुर्भुज मंदिर में उत्तर भारत के नागर एवं दक्षिण भारत के द्रविड़ की मिश्रित शैली देखने को मिलती है | 



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ग्वालियर के किले के बारे में और अधिक जानने के लिए नीचे दिए गए वीडियो को देखें | 


आपका  आभार
नीलम